रविवार, 27 सितंबर 2009

मारीशस के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री एवं संसद सदस्य से बातचीत का एक अंश : एक नयी क्रांति का आगाज़

दोस्तों .................मुझे नहीं पता की आपको मेरे इस ब्लॉग में कोई रूचि होगी की नहीं परन्तु मै यह बात आप तक इसलिए पहुचाना चाहता हूँ क्योंकि यह बात अनेकता में एकता की दुहाई देने वाले भारत से जुडी है , परम्पराओं को पूर्वजों का अनमोल उपहार समझ कर ह्रदय में सजों कर रखने वाले भारत से जुडी है ! आप सबको पता है भारत में लगभग 30 भाषाएँ बोली जाती हैं , लेकिन उनमे से सबसे ज्यादा लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषा भोजपुरी की उपेक्षा किसी से छिपी नहीं है !.......जगदीश गोवेर्धन ...........यह नाम शायद आप लोगों ने कभी न सुना हो लेकिन यह नाम मारीशस की धरती पर उतना ही मशहूर है जितना भारत में लोकनायक जय प्रकाश नारायण एवं प्रणव मुखर्जी ! मारीशस की राजनीति के सक्रिय नेता जो कि सन 1975 से सन 2000 तक तमाम मंत्रालयों कि सोभा बढाते रहे हैं , कभी स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर तो कभी संसद सदस्य के तौर पर जगदीश गोवेर्धन जनसेवा से जुड़े रहे ! कम्युनिटी हेल्थ मोमेंट के निदेशक एवं तमाम अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आज भी जुड़े हैं ! भारतीय मूल के जगदीश गोवेर्धन मारीशस में इतने बड़े हस्ती के रूप में होते हुए भी अगर कुछ नहीं भूले तो सिर्फ अपनी भाषा भोजपुरी एवं मातृभूमि बिहार !

माननीय गोवेर्धन जी से मेरी पहली मुलाक़ात दिल्ली स्थित मारीशस दूतावास में उस दौरान हुई जब वे अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी सम्मलेन जो कि अगस्त के अंत में मारीशस में आयोजित होना था , कि मूलभूत तैयारियां पूरी करने के लिए भारत दौरे पर थे ! मारीशस दूतावास में हो रही बातचीत में दिल्ली के तमाम गणमान्य भी उपस्थित थे ! भोजपुरी सम्मेलन से मेरा जुड़ाव बिलकुल नया था ! बातचीत के क्रम में महुवा के नयूज रीडर देवेन्द्र पराशर भी मौजूद थे !

उस बातचीत के बाद मेरा गोवेर्धन जी से नियमित संपर्क बना रहा !हाल ही में 25 सिप्तम्बर की रात ९ बज कर ३० मिनट पर मेरी उनसे लगभग आधे घंटे फोन पर बात हुई जिसमे मारीशस में संपन्न हुए सम्मेलन से लेकर भोजपुरी कि हो रही उपेक्षा पर व्यापक बातचीत हुई ! बातचीत में बार बार वो एक संघर्ष कि बात कर रहे थे ! उनका कहना था कि जब भोजपुरी के अंतरार्ष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया के २५ देश {फ्रांस,होलैंड,सूरीनाम ,भारत ,मारीशस } जैसे देश भाग ले रहे हैं तो फिर आखिर क्यों भोजपुरी को अपने वतन में राष्ट्रिय महत्त्व नहीं मिल रहा है ! अपने संघर्ष के दम पर मारीशस में भोजपुरी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाने वाले श्री जगदीश गोवेर्धन ने साफ़ कहा कि ५००० साल पुरानी भाषा भोजपुरी कि पढाई भी मारीशस के स्कूलों में शुरू हो चुकी है तो फिर भारत में क्यों नही ? भोजपुरी को संवैधानिक महत्त्व दिलाने के लिए आगामी क्रान्ति का संकेत भी माननीय जगदीश जी ने अपनी बातचीत में दिया ! भोजपुरी का राष्ट्रीय महासम्मेलन साल के अंत में आगरा में आयोजित करने कि बात भी गोवेर्धन जी ने की और साथ ही यह भी कहे कि इस सम्मेलन के माध्यम से समूचे देश में क्रांति का आह्वान किया जाएगा और यह क्रान्ति हजारों लाखों लोगों के साथ दिल्ली राजभवन से शुरू होगी !



इस तमाम बातचीत ने कहीं ना कही मुझे भी यह कहने पर मजबूर कर दिया है कि अगर यह भाषा मारीशस में फल फुल सकती है तो क्या भारत में नही ! माननीय गोवेर्धन जी से मेरी बातचीत तो होती रहती है परन्तु क्या हमारी या भोजपुरिया लोगों कि ये जिम्मेदारी नही है कि वो अपने भाषा के सम्मान कि लड़ाई में आगे आयें !...................भोजपुरी जय हो